Thursday, July 7, 2022

BHAIRAVASANA / भैरवासन

 भैरवासन के फायदे, तरीका, लाभ और नुकसान

Bhairavasana Aka Formidable Pose Benefits-

 

भैरवासन (Bhairavasana) के फायदे नुकसान- एक खास योग मुद्रा है, जिसकी मदद से जांघ कूल्हे की मांसपेशियों की कमजोरी को दूर किया जाता है।

 

भैरवासन एक खास योग मुद्रा है, जिससे शरीर पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इसे वशिष्ठासन का जटिल संस्करण भी कहा जाता है। भैरवासन योग मुद्रा वास्तव में एक जटिल क्रिया है, जिसे शुरुआती अभ्यासकर्ताओं द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। इसमें शारीरिक मुद्रा कुछ इस प्रकार की होती है, जिसमें व्यक्ति को गिरकर चोट लगने का खतरा होता है इसलिए एक योग प्रशिक्षक की मदद से ही इसका अभ्यास करना चाहिए। भैरवासन प्रमुख रूप से जांघ की मांसपेशियों को लचीलता प्रदान करता है और साथ ही इससे मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। भैरवासन को सुप्त भैरवासन और अंग्रेजी में डिस्ट्रॉयर ऑफ यूनिवर्स (Destroyer of the Universe Pose) के नाम से भी जाना जाता है।

 

भैरवासन के फायदे (Benefits of Bhairavasana)

 

भैरवासन एक ऐसा योगाभ्यास है, जिसे सही तकनीक और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे निम्न स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं

 

1. रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए भैरवासन

भैरवासन का योगाभ्यास सही तरीके से करने से रीढ़ की हड्डी उसके आसपास की मांसपेशियों में आवश्यक तनाव आने लगता है, जिससे लचीलापन बढ़ जाता है।

2. ऐंठन का का इलाज करे भैरवासन

नियमित रूप से भैरवासन अभ्यास करने से शरीर के कई महत्वपूर्ण मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन उससे संबंधित अन्य समस्याएं ठीक होना बंद हो जाती हैं।

3. कूल्हे की मांसपेशियों को लचीला बनाए भैरवासन

विशेष सावधानियां बरतते हुए यदि भैरवासन अभ्यास किया जा रहा है, तो ऐसे में कूल्हे और उसके आसपास की मांसपेशियां जैसे जांघ आदि की मांसपेशियों में लचीलापन आने लगता है।

4. तंत्रिका तंत्र में सुधार लाता है भैरवासन

भैरवासन अभ्यास करना शरीर के अन्य अंगों के साथ तंत्रिका तंत्र के कार्यों में भी सुधार करता है। इस योग मुद्रा से तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रक्रिया तेज हो जाती है और रक्त संचार प्रक्रिया में सुधार होता है।

5. मानसिक स्वास्थ्य में लाभदायक है भैरवासन

भैरवासन योग मुद्रा अभ्यास करने के सिर्फ शारीरिक लाभ नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी कई लाभ मिलती हैं, जिससे डिप्रेशन अन्य मानसिक रोगों का इलाज करने में मदद मिलती है।

 

हालांकि, भैरवासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह से योगासन के तरीके और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।

 

भैरवासन करने का तरीका (Steps to do Bhairavasana)

 

यदि आप पहली बार भैरवासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है

 

·                     Step 1 - सबसे पहले सपाट जमीन पर मैट बिछा लें और उसपर दंडासन योग मुद्रा में बैठ जाएं

·                     Step 2 - दाएं घुटने को मोड़े और उसके पीछे से दाएं हाथ को लाते हुए नीचे हथेली रख लें

·                     Step 3 - दाएं हाथ की हथेली दाएं घुटने के ठीक नीचे होने चाहिए

·                     Step 4 - अब हल्के से दाईं तरफ मुड़ें और बाएं हाथ से दाएं पैर को उठाकर गर्दन पर रख लें

·                     Step 5 - गर्दन तक टांग को लाने के लिए उसे टखने से पकड़ें और सिर को थोड़ा नीचे झुका लें

·                     Step 6 - अब बाईं हथेली को ठीक कंधे के नीचे और दाईं हथेली को पीछे रखें

·                     Step 7 - दाईं तरफ शरीर का झुकाव करते हुए दोनों हथेलियों और बाएं हाथ पर शरीर का वजन डालें

·                     Step 8 - कोहनियों को सीधा कर लें जिससे आपका शरीर जमीन से पूरा उठ जाएगा

·                     Step 9 - अब बाएं हाथ को हटाएं और दाएं हाथ बाएं पैर पर शरीर का वजन डालना शुरू करें

·                     Step 10 - बाएं हाथ को आप ऊपर की तरफ कर सकते हैं और अपनी

क्षमता के अनुसार अवधि तक यह योग मुद्रा बना सकते हैं।

 

इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में जाएं और यदि आपको इससे संबंधी कोई भी सवाल है, तो योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।

 

भैरवासन के दौरान सावधानियां (Precautions during Bhairavasana)

 

भैरवासन योग मुद्रा बनाने के दौरान मुख्य रूप से निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए -

·                     पूरा ध्यान योग मुद्रा पर केंद्रित रखें ताकि आपको संतुलन बनाए रखने में कोई दिक्कत हो

·                     शरीर में सिर्फ इतना ही खिंचाव आने दे जितना संभव हो

·                     किसी प्रकार का झटका लगने दें

·                     टांग गर्दन पर यदि नहीं जा रही है तो बलपूर्वक ऐसा करने की कोशिश करें

·                     योग क्रिया शुरू करने से पहले अच्छे से वार्मअप कर लें

 

भैरवासन कब करें (When not to do Bhairavasana)

 

कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान भैरवासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए

 

·                     शरीर के किसी हिस्से में दर्द या गंभीर चोट लगी होना

·                     हाई या लो बीपी

·                     सांस या हृदय संबंधी रोग होना

·                     वृद्धावस्था या विकलांगता (जिससे शारीरिक संतुलन बनाने में दिक्कत हो रही हो)

·                     मासिक धर्म या गर्भावस्था

 

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